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Mazhab Hi To Sikhata Hai Aapas Me Bair Rakhna (मज़हब ही तो सिखाता & (en Hindi)
Arya, Rakesh Kumar (Autor)
·
Diamond Pocket Books Pvt Ltd
· Tapa Blanda
Mazhab Hi To Sikhata Hai Aapas Me Bair Rakhna (मज़हब ही तो सिखाता & (en Hindi) - Arya, Rakesh Kumar
Libro Nuevo
Origen: Estados Unidos
$ 12.99$ 12.22
Reseña del libro "Mazhab Hi To Sikhata Hai Aapas Me Bair Rakhna (मज़हब ही तो सिखाता & (en Hindi)"
मज़हब व्यक्ति के मानस को विकृत करता है। संसार में जितना रक्तपात मजहब को लेकर हुआ है, उतना किसी अन्य बिन्दु पर नहीं हुआ। 300 वर्ष तक चलने वाला क्रूसेड युद्धों का क्रम और उसके पश्चात अनेक देशों का इस्लामीकरण किया जाना या ईसाईकरण किया जाना हमारी इस बात की पुष्टि करता है। यहां तक कि भारत का विभाजन भी 1947 में मजहब के आधार पर ही हुआ था।आज भी विश्व के अनेक देश इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रहे हैं। यहूदियों के एकमात्र देश इजराइल को केवल इसलिए मिटाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह यहूदी देश है। इसी प्रकार अनेक शक्तियों की दृष्टि में भारत भी अखरता है, जिसे वे हिंदू देश के रूप में देखती हैं। इस सत्य को भुलाकर भी लोग अक्सर कहते हैं कि 'मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना' जबकि तथ्य बता रहे हैं कि 'मज़हब तो सिखाता है आपस में बैर रखना।'17 जुलाई 1966 को ग्राम महावड़ जनपद गौतम बुद्ध नगर में जन्मे डॉ राकेश कुमार आर्य का साहित्य इसी प्रकार के राष्ट्रवादी चिंतन को लेकर लिखा गया है। इस पुस्तक में भी विद्वान लेखक ने मजहब की इसी प्रकार की विभाजनकारी और रक्तपात से भरी सोच को उद्घाटित करने का प्रयास किया है, जिससे पुस्तक बहुत ही उपयोगी बन गई है।
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El libro está escrito en Hindi.
La encuadernación de esta edición es Tapa Blanda.
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